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पहुँचे 'अन्तिम काल' में ,भोले के दरबार

माननीय मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव को काशी विश्वनाथ मन्दिर में पहली बार जनताने टी वी पर 'भोले नाथ के दर्शन अर्चन करते देखा । हिदुजनों में एक विस्मय और मुसलमानों में आशंका की लहर दौड़ गई । "जहाँ न पहुँचे रवि ,वहाँ पहुँचे कवि '' , यह कहावत पुरानी है । तो मेरा अत्यधिक सुकुमार और जिज्ञासु कवि उसी अवसर पर वहाँ उपस्थित हो गया और वहाँ मुख्यमंत्री और भोले नाथ के मध्य जो कुछ घटित हुआ ,उसी पर मेरे कवि मन की काव्यात्मक प्रतिक्रिया प्रस्तुत है ........

"पढ़ते रहे 'नमाज 'हैं ,पांच साल 'सरकार '।
पहुँचे 'अन्तिम समय' में ,भोले के दरबार ।।
भोले के दरबार , कहे 'माई' था पक्का ।
'डी' से जुड़कर मुझे, दिया 'एम' है धक्का।।
' मोदी मोदी 'वोल , दिख रहे दिनदिन बढ़ते ।
आये हैं हम अतः , यहाँ यों शिव शिव पढ़ते।।"

"भोले नें अखिलेश से , पूंछा एक सवाल ।
क्यों 'भक्तों 'के त्रास पर, तुमको नहीं मलाल ??
तुमको नहीं मलाल , प्रजा पालक हो कैसे ?
'माई' 'दाई ' भेद , नहीं 'नृप' करते ऐसे ।।
होती सिर्फ 'अजान' , 'शंख घड़ियाल' न बोले !
'आत्मनिरीक्षण करो' , हुये चुप कहकर भोले ।।"


विशेष ......
"पढ़ते रहे नमाज" ... अर्थात् पूरे 5 वर्ष तक केवल मस्जिदों दरगाहों ,कब्रिस्तानों की मरम्मत कराते रहे ,मदरसों और हज हाउसों का निर्माण कराते रहे ।मुस्लिम
लड़कियों के विवाह सरकारी कोष से कराते रहे । कुलमिलाकर मुस्लिममज़हबी निर्देशों के अनुरूप शासन करते रहे ।

" सरकार ."... मुख्यमंत्री ,शासक ।

"अन्तिम समय" ....?

"डी (D..)."... दलित ,Dalit ।

" एम (.M)". ..मुसलमान ,Musalman ।

"माई (MY )"...मुसलमान ,यादव ।

"दाई (DY )."... दलित ,यादव । 1993 में कांशीराम और और मुलायम सिंह ने मिलकर यह समीकरण बनाया था और नारा दिया गया था .. "मिले मुलायम कांशीराम ,हवा में उड़ गये जय श्रीराम"

"नृप "....शासक अर्थात् मुख्यमंत्री ।

"भक्तों के त्रास '.... अयोध्या में राममंदिर आन्दोलन के समय राम भक्तों कीनिर्मम हत्या ,कांट में दलितोँ की बस्ती के शिव मंदिर से लाउड स्पीकर का उतरवा देना, मुजफ्फरनगर दंगे में हिंदुओं के पीड़ित पक्ष पर ही इकतरफा उत्पीड़क कार्यवाही आदि की ओर संकेत ।

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