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"जन भाषा में हम कहें ,यह है बकराबाद ।"

गत लगभग एक शताब्दी से सभी "वाद " जैसे साम्यवाद ,समाजवाद ,अध्यात्मवाद आदि गांधीवाद के सामने निरर्थक सिद्ध हुये है और ये सबके सब वाद ( isms) "गांधीवाद के गटर " में समा गए और गांधीवाद वस्तुतः "समर्पण वाद" है । जिसे जनभाषा में "बकरावाद " कह सकते हैं। गांधीवादऔर बकरावाद परस्पर पर्यायवाची हैं । आज की पोस्ट इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तुत है देशभक्त सम्वेदनशील जन अपनी प्रतिक्रिया अवश्य देने की कृपा करें ......

" गांधीवादी हैं गढ़े ,एक नया अपवाद ।
जनभाषा में हम कहें ,यह है बकरा वाद ।।
यह है 'बकरावाद 'अर्थ 'अविरोध ' समर्पण।
'वेटी 'मांगे 'दस्यु ' ,'बहू भी कर दो अर्पण ।।
यह है पथ निर्विघ्न,सफल सुख सुविधावादी।
कायर भोगी भीरु, मुखौटा गांधीवादी।।"

" दर्शन 'वाद' 'निरर्थ' सब, सार्थक बकरावाद ।
कटने को तत्पर रहें, विना किसी 'प्रतिवाद'।।
विना किसी प्रतिवाद , सभी ये बकरी बकरे।।
कोई भी अपमान , गुलामी इन्हें न अखरे ।।
पैसा पद की घास ,मात्र इनका आकर्षण ।
पिटते कटते रहो , यही है 'बकरा दर्शन' ।।"

"मिमियाते हैं यदि कभी , करके कमरे बन्द।
अधिक 'घास' के लिए ये , करें सभी छलछन्द।।
करें सभी 'छल छन्द' ,हिन्दुजन कैस टूटें ।
टूटा हुआ समाज , दुहत्था कैसे लूटें ।।
ये हैं सेकुलर सिंह, जोर से हैं चिल्लाते।
कठमुल्लों के द्वार , मरे से हैं मिमियाते ।।"

विशेष .....
'अपवाद '...नीच विचारधारा ।
'बकरावाद '...?
'अविरोध' .... विना किसी विरोध के ।
'निर्विघ्न'... विना किसी विघ्न के ।
'वाद '..... विचारधारा ,जैसे समाजवाद आदि ।
'निरर्थ '..... निरर्थक ।
'प्रतिवाद '.... विना किसी विरोध के ।
'बकरा दर्शन' ...बकरावाद अर्थात् गांधीवाद ।
'अधिक घास' ..अधिक से अधिक पैसा पद पाने की इच्छा
'सेकुलर ' छद्म मुस्लिम ।
' दस्यु .'.... डकैत ।


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