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आप सभी लोगों ने मुलेठी को कभी-कभी तो खाया ही होगा अगर नहीं खाया है तो इसे खाना शुरू कर दीजिए क्योंकि इसके आपको बहुत सारे आयुर्वेदिक लाभ मिलने वाले हैं. मुलहठी खांसी, जुकाम, उल्टी व पित्त को बंद करती है. मुलहठी अम्लता में कमी व क्षतिग्रस्त व्रणों (जख्मों) में लाभकारी है. अम्लोत्तेजक पदार्थ को खाने पर होने वाली पेट की जलन और दर्द, पेप्टिक अल्सर तथा इससे होने वाली खून की उल्टी में मुलहठी अच्छा प्रभाव छोड़ती है. मुलहठी का उपयोग कड़वी औषधियों का स्वाद बदलने के लिए किया जाता है.

मुलहठी आंखों के लिए लाभदायक, बालों को मुलायम, आवाज को सुरीला बनाने वाली और सूजन में लाभकारी है. मुलहठी विष, खून की बीमारियों, प्यास और क्षय (टी.बी.) को समाप्त करती है. चलिए जानते हैं मुलेठी खाने के फायदों के बारे में.

सर्दी, खांसी और जुखाम : अगर आपको सर्दी खांसी जुखाम की समस्या की वजह से आपकी छाती में कफ जमा हो गया है तो यह आपके कफ को निकालने में बहुत मदद करती है.

गले की खराश, गले का बैठ जाना : मुलेठी चबाने से मुंह में लार का स्राव बढ़ता है. और यह आपकी आवाज को भी मधुर बनाती है. और यह शवशन संबंधी रोगों जैसे गले की खराश, गले का बैठ जाना, खांसी आदि में बहुत फायदेमंद होती है.

पेट में एसिड : अगर आपके गले में जलन या सूजन है तो मुलेठी को मुंह में रखकर चुसिए ऐसा करने से गले की जलन और सूजन में आराम मिलेगा और आपके पेट में एसिड के स्तर को भी नियंत्रित करती है.

सीने की जलन और खाना ना पचना : अगर आपके सीने में जलन हैं और खाना भी सही तरीके से नहीं पच रहा है तो मुलेठी को मुंह में रखकर चूसना होगा इससे आपको सीने की जलन और खाना ना पचने की समस्या में राहत मिलेगी.

घाव (जख्म) : मुलहठी पेट में बन रहे एसिड (तेजाब) को नष्ट करके अल्सर के रोग से बचाती है. पेट के घाव की यह सफल औषधि है. मुलहठी खाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है. इसका सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए. बीच-बीच में बंद कर दें.

कफ व खांसी : खांसी होने पर यदि बलगम मीठा व सूखा होता है तो बार-बार खांसने पर बड़ी मुश्किल से निकल पाता है. जब तक गले से बलगम नहीं निकल जाता है, तब तक रोगी खांसता ही रहता है. इसके लिए 2 कप पानी में 5 ग्राम मुलहठी का चूर्ण डालकर इतना उबाल लें कि पानी आधा कप बचे. इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें. 3 से 4 दिन तक प्रयोग करने से कफ पतला होकर बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी, दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है. यक्ष्मा (टी.बी.) की खांसी में मुलहठी चूसने से लाभ होता है.

पौरुष कमजोरी : रोजाना मुलहठी चूसने से शारीरिक कमजोरी नष्ट हो जाती है. 10 ग्राम मुलहठी का पिसा हुआ चूर्ण, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध को पीने से  पौरुष कमजोरी के रोग कुछ ही समय में कम हो जाता है.

दाह (जलन) : मुलहठी और लालचंदन पानी के साथ घिसकर शरीर पर लेप करने से जलन शांत होती है.

अम्लपित्त (एसिडिटिज) : खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हैं, जलन होती है तो मुलहठी चूसने से लाभ होता है. भोजन से पहले मुलहठी के 3 छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसें, फिर भोजन करें.

कब्ज़, आंव : 125 ग्राम पिसी मुलहठी, 3 चम्मच पिसी सोंठ, 2 चम्मच पिसे गुलाब के सूखे फूल को 1 गिलास पानी में उबालें. जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छानकर सोते समय रोजाना पीने से पेट में जमा आंव (एक तरह का चिकना सफेद मल) बाहर निकल जाता है. या 5 ग्राम मुलहठी को गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आता है और कब्ज दूर हो जाती है.

हिचकी : मुलहठी के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से हिचकी आना बंद हो जाती है.

उल्टी लाने के लिए : पेट में अम्लता (एसिडिटीज) और पित्त बढ़ने पर जी मिचलाता है, तबीयत में बेचैनी और घबराहट होती है, उल्टी नहीं होती जिसके कारण सिरदर्द शुरू हो जाता है. ऐसी स्थिति में उल्टी लाने के लिए 2 कप पानी में 10 ग्राम मुलहठी का चूर्ण डालकर उबाल लें. जब पानी आधा कप बचे, तब इसे उतारकर ठंडा कर लें. फिर राई का 3 ग्राम पिसा चूर्ण इसमें डालकर पीयें. इससे उल्टी हो जाती है. उल्टी होने से पेट में जमा, पित्त या कफ निकल जाता है और तबीयत हल्की हो जाती है. रोगी को बहुत आराम मिलता है. यह तरीका विषाक्त (जहर में), अजीर्ण (भूख का कम होना), अम्लपित्त (एसिडिटीज), खांसी और छाती में कफ जमा होने पर करने से बहुत लाभ मिलता है.

अनियमित मासिक-धर्म : 1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण थोड़े शहद में मिलाकर चटनी जैसा बनाकर चाटने और ऊपर से मिश्री मिलाकर ठंडा किया हुआ दूध घूंट-घूंटकर पीने से मासिकस्राव नियमित हो जाता है. इसे कम से कम 40 दिन तक सुबह-शाम पीना चाहिए. यदि गर्मी के कारण मासिकस्राव में खून का अधिक मात्रा में और अधिक दिनों तक जाता (रक्त प्रदर) हो तो 20 ग्राम मुलहठी चूर्ण और 80 ग्राम पिसी मिश्री मिलाकर 10 खुराक बना लें. फिर इसकी एक खुराक शाम को एक कप चावल के पानी के साथ सेवन करें. इससे बहुत लाभ मिलता है. नोट : मुलहठी को खाते समय तले पदार्थ, गर्म मसाला, लालमिर्च, बेसन के पदार्थ, अण्डा व मांस का सेवन नहीं करना चाहिए.

पेशाब के रोग : पेशाब में जलन, पेशाब रुक-रुककर आना, अधिक आना, घाव और खुजली और पेशाब सम्बंधी समस्त बीमारियों में मुलहठी का प्रयोग लाभदायक है. इसे खाना खाने के बाद रोजाना 4 बार हर 2 घंटे के उंतराल पर चूसते रहना लाभकारी होता है. इसे बच्चे भी आसानी से बिना हिचक ले सकते हैं. या 1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण 1 कप दूध के साथ लेने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है.

हृदय शक्तिवर्धक (शक्ति को बढ़ाने वाला) : ज्यादातर शिराओं और धमनियों पर गलत खान-पान, गलत आदतें और काम का अधिक भार पड़ने से कमजोरी आ जाती है, इससे हृदय को हानि पहुंचती है. इस कारण से अनिंद्रा (नींद का न आना), हाई और लोब्लड प्रेशर जैसे रोग हो जाते हैं. ऐसे में मुलहठी का सेवन काफी लाभदायक होता है.

फेफड़ों के रोग : मुलहठी फेफड़ों की सूजन, गले में खराश, सूजन, सूखी कफ वाली खांसी में लाभ करती है. मुलहठी फेफड़ों को बल देती है. अत: फेफडे़ सम्बंधी रोगों में यह लाभकारी है. इसको पान में डालकर खाने से लाभ होता है. टी.बी. (क्षय) रोग में भी इसका काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है.

विष (ज़हर) : जहर पी लेने पर शीघ्र ही उल्टी करानी चाहिए. तालु को उंगुली से छूने से तुरन्त उल्टी हो जाती है. यदि उल्टी नहीं आये तो एक गिलास पानी में 2 चम्मच मुलहठी और 2 चम्मच मिश्री को पानी में डालकर उबाल लें. आधा पानी शेष बचने पर छानकर पिलायें. इससे उल्टी होकर जहर बाहर निकल आता है.

निकट दृष्टि दोष (पास की नज़र में कमी) : निकट दृष्टि को बढ़ाने में मुलहठी का प्रयोग गुणकारी होता है. 1 चम्मच मुलहठी का पाउडर, इतना ही शहद और आधा भाग घी तीनों को मिलाकर 1 गिलास गर्म दूध से सुबह-शाम लेने से निकट दृष्टि दोष (पास से दिखाई न देना) दूर हो जाता है.

मांसपेशियों का दर्द : मुलहठी स्नायु (नर्वस स्टिम) संस्थान की कमजोरी को दूर करने के साथ मांसपेशियों का दर्द और ऐंठन को भी दूर करती है. मांसपेशियों के दर्द में मुलहठी के साथ शतावरी और अश्वगंधा को समान रूप से मिलाकर लें. स्नायु दुर्बलता में रोजाना एक बार जटामांसी और मुलहठी का काढ़ा बनाकर लेना चाहिए.

गंजापन, रूसी (ऐलोपीका) : मुलहठी का पाउडर, दूध और थोड़ी-सी केसर, इन तीनों का पेस्ट बनाकर नियमित रूप से बाल आने तक सिर पर लगायें. इससे बालों का झड़ना और बालों की रूसी आदि में लाभ मिलता है.

सूखी खांसी : सूखी खांसी में बलगम पैदा करने के लिए 1 चम्मच मुलहठी को शहद के साथ दिन में 3 बार चटाना चाहिए. इसका 20-25 ग्राम काढ़ा सुबह-शाम पीने से श्वासनलिका (सांस की नली) साफ हो जाती है.

खून के बहने पर : मुलहठी की जड़ का चूर्ण और शर्करा को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें. इस 3 से 6 ग्राम चूर्ण को चावल के पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से खून का अधिक बहना कम हो जाता है.

आंखों की जलन दूर करना और रोशनी बढ़ाना : मुलहठी के काढे़ से आंखों को धोने से आंखों के रोग दूर होते हैं. इसकी जड़ के चूर्ण में बराबर मात्रा में सौंफ का चूर्ण मिलाकर 1 चम्मच सुबह-शाम खाने से आंखों की जलन मिटती है तथा आंखों की रोशनी बढ़ती है.

आंखों की लालिमा : मुलहठी को पानी में पीसकर उसमें रूई का फोहा भिगोकर आंखों पर बांधने से आंखों की लालिमा मिटती है.

सिर में दर्द : किसी भी प्रकार के सिर के दर्द में 10 ग्राम मुलेठी का चूर्ण, 40 ग्राम कलिहारी का चूर्ण तथा थोड़ा सा सरसों का तेल मिलाकर नासिका में नसवार की तरह सूंघने से लाभ होता है. या मुलहठी, मिश्री और घी को घोटकर सूंघने से पित्तज के कारण होने वाला सिर का दर्द ठीक हो जाता है.

रंग को साफ करने के लिए : मुलेठी को पानी में पीसकर शरीर पर लेप करने से शरीर की रौनक बढ़ती है.

बालों के लिए : मुलेठी के बने काढ़े (क्वाथ) से बाल धोने से बाल बढ़ते हैं. मुलेठी और तिल को भैंस के दूध में पीसकर सिर पर लेप करने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है.

मिर्गी के लिए : मुलेठी के 1 चम्मच बारीक चूर्ण को घी में मिलाकर दिन में 3 बार चटाने से लाभ होता है.

प्यास अधिक लगना : मुलहठी को चूसने से प्यास मिट जाती है. मुलहठी में शहद मिलाकर सूंघने से तेज प्यास खत्म हो जाती है तथा थोड़े-थोड़े देर पर लगने वाली प्यास मिट जाती है.

हृदय रोग : मुलहठी तथा कुटकी के चूर्ण को पानी के साथ सेवन करने से दिल के रोग में लाभ होता हैं.

रक्तपित्त के कारण उल्टी : 3 से 5 ग्राम मुलहठी नियमित सुबह-शाम सेवन करने से रक्तपित्त शांत होता है. इससे खून की कमी तथा खून के विकार दूर हो जाते हैं.

खून की उल्टी : 4 ग्राम मुलहठी का चूर्ण लेकर दूध या घी के साथ रोज सुबह-शाम खायें इससे खून की उल्टी बंद हो जाती है.

पेट में गैस का होना : 2 से 5 ग्राम मुलहठी का चूर्ण पानी और मिश्री के साथ सेवन करने से पेट मे गैस कम हो जाती है.

पीलिया : पीलिया रोग में 1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर या इसका काढ़ा पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है.

शारीरिक कमजोरी में : 1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण आधा चम्मच शहद और एक चम्मच घी मिलाकर 1 कप दूध के साथ सुबह-शाम रोजाना 5-6 हफ्ते तक सेवन करने से शरीर में बल बढ़ता है.

फोड़े : फोड़े होने पर मुलहठी का लेप लगाने से वे जल्दी पककर फूट जाते हैं.

आंत्रवृद्धि : मुलहठी, रास्ना, बरना, एरण्ड की जड़ और गोक्षुर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनायें. इस काढ़े में एरण्ड का तेल डालकर पीने से आंत्रवृद्धि में लाभ होता है.

आंख आना : मुलहठी को पानी में डालकर रख दें. 2 घंटे के बाद उस पानी में रूई डुबोकर पलकों पर रखने से आंखों की जलन और दर्द दूर हो जाता है. आंख आने पर या आंखों के लाल होने के साथ पलकों में सूजन आने पर मुलहठी, रसौत और फिटकरी को एक साथ भूनकर आंखों पर लेप करने से बहुत आराम आता है.

श्वास का दमा का रोग : 50 ग्राम मुलहठी, 20 ग्राम सनाय और 10 ग्राम सोंठ को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें. इस आधा चम्मच चूर्ण को शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से श्वास रोग (दमा) से आसानी से छुटकारा मिल जाता है. या 10 ग्राम मुलहठी का चूर्ण, 5 ग्राम कालीमिर्च और 1 गांठ अदरक को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें. इसे काढे़ को छानकर पीने से दमे के रोग में आराम आता है. या 5 ग्राम मुलहठी को 1 गिलास पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाए तो इस पानी को आधा सुबह तथा आधा शाम को पियें. 3-4 दिन ऐसा करने से कफ पतला होकर निकल जाएगा और खांसी शांत हो जायेगी.

मलेरिया का बुखार : 10 ग्राम मुलहठी छिली हुई, 5 ग्राम खुरासानी अजवाइन तथा थोड़ा-सा सेंधानमक को मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है.

आंखों के रोग : मुलहठी, पीला गेरू, सेंधानमक, दारूहल्दी और रसौत इन सबको बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ सिल पर पीस लें. आंखों के बाहर इसका लेप करने से आंखों के सभी रोग समाप्त हो जाते हैं. इससे आंखों का दर्द और आंखों की खुजली में विशेष लाभ होता है.

दांत निकलना : मुलहठी का बारीक चूर्ण बनाकर बच्चों को खिलायें. इससे दांत आसानी से निकल आते हैं और बार-बार दस्त का आना बंद हो जाता है.

खांसी : मुलहठी का छोटा सा टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से खांसी का प्रकोप शांत हो जाता है. मुलहठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से भी खांसी दूर हो जाती है. या 3 ग्राम मुलहठी का चूर्ण दिन में 3 बार शहद के साथ सेवन करने से खांसी में लाभ होता है. खांसी में मुलहठी का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से राहत मिलती है. सावधानी : खांसी का वेग रोकने से विभिन्न रोग हो सकते हैं जो निम्नलिखित हैं. दमा का रोग, हृदय रोग, हिचकी, अरुचि, नेत्र रोग.

आमाशय (पेट) का जख्म : मुलहठी की जड़ को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस चूर्ण को 4-4 ग्राम के रूप में दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करें या पकाकर बने काढ़े को 40 मिलीलीटर की मात्रा में रोजाना शहद के साथ मिलाकर पीयें. इससे आमाशय का जख्म (पेट का जख्म) ठीक हो जाता है.

रतौंधी (रात में न दिखाई देना) : 3 ग्राम मुलहठी, 8 ग्राम आंवले का रस और 3 ग्राम अश्वगंधा के चूर्ण को एक साथ मिलाकर रोजाना सेवन करने से रतौंधी (रात में न दिखाई देना) का रोग दूर हो जाता है और आंखों की रोशनी बढ़ जाती है.

उल्टी : उल्टी होने पर मुलहठी का टुकड़ा मुंह में रखने से उल्टी होना बंद हो जाती है.

मुंह के छाले : मुलहठी के चूर्ण को फूले हुए कत्था के साथ मिलाकर छाले पर लगाएं और लार बाहर टपकने दें. इससे मुंह की गन्दगी खत्म होकर मुंह के छाले दूर होते हैं. या मुलहठी का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से मुंह के छाले सूख जाते हैं.

गले की खरास : मुलहठी, पिपरमिंट, छोटी इलायची, लौंग, जावित्री तथा कपूर को बारीक पीस लें, फिर इसे पानी साथ मिलाकर छोटी-छोटी लगभग 1 ग्राम के चौथाई भाग की गोली बनाकर रखें. रोजाना सुबह-शाम 1-1 गोली मुंह में रखकर चूसने से गले की खरास दूर होती है, आवाज साफ होती है व जीभ रोग ठीक होते हैं.

मुंह की दुर्गन्ध : मुलैठी को चबाने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है.

मासिकस्राव संबन्धी परेशानियां : आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाटना चाहिए. लगभग 1 महीने तक मुलहठी का चूर्ण लेने से मासिकस्राव सम्बन्धी सभी रोग दूर हो जाते हैं.

श्वेत प्रदर रोग : 1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण और 1 चम्मच पिसी हुई मिश्री को चावल के पानी के साथ सेवन करने से प्रदर रोग मिट जाता है. या मुलहठी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 1 ग्राम लेकर पानी के साथ नियमित सुबह-शाम लें. इससे श्वेतप्रदर में आराम पहुंचता है.

जुकाम : गुलबनफ्शा, मुलहठी और देशी अजवायन को बराबर लेकर पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को लगभग डेढ़-डेढ़ ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से नजला, जुकाम और खांसी ठीक हो जाती है.

पेट में दर्द : आधा चम्मच मुलहठी का पिसा हुआ चूर्ण और 1 चम्मच सौंफ के चूर्ण को पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है. या मुलहठी की जड़ का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करें. इससे पेट और आंतों की ऐंठन व क्षोभ से उत्पन्न दर्द में लाभ मिलता है.

बांझपन : मुलहठी, कंघी, खिरैटी, खांड, बड़ के उंकुर और नागकेशर को लेकर एक साथ बारीक पीस लें, फिर इसे शहद, दूध और देशी घी में मिलाकर सेवन करने से बांझ स्त्री को भी लड़के की प्राप्ति हो जाती हैं.

दिल की धड़कन : लगभग 4 ग्राम मुलेठी के चूर्ण को सुबह-शाम घी या शहद के साथ सेवन करने से दिल के सारे रोगों में लाभ होता है.

उपदंश (सिफलिस) : मुलहठी, खस, मंजीठ, गेरू, रसौत, पद्माख, चंदन और कमल इन दोनों को ठंडे पानी में पीसकर लेप करने से पित्तज उपदंश में मिलता है.

दिल की कमजोरी : 5 ग्राम मुलहठी के चूर्ण को दूध या घी के साथ सुबह-शाम रोगी को देने से दिल की कमजोरी दूर हो जाती है.

खसरा : मुलहठी, गिलोय, अनार के दाने और किशमिश को बराबर लेकर और उन्हें पीस लें, फिर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर दिन में 2-3 बार बच्चे को खिलाएं. इससे खसरे का असर कम होता है.

बच्चों का बुखार : 5-5 ग्राम दारूहल्दी, मुलेठी, कटेरी, हल्दी और इन्द्रजौ को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें, फिर इसे छानकर बच्चे को पिलाने से बुखार में आराम आता है.

होठों का फटना : वातज रोग में लोहबान, राल, गूगल, देवदारू तथा मुलेठी को बराबर मात्रा मे लेकर पीसकर रख लें, फिर इस चूर्ण को धीरे-धीरे होठों पर लगाने से फटे होठ ठीक हो जाते हैं.

खून की कमी : लगभग आधा ग्राम मुलहठी का चूर्ण रोजाना सेवन करने से खून में वृद्धि होती है.

छोटे बच्चों के मुंह से लार टपकना : सारिवा, तिल, लोध और मुलहठी का काढ़ा बना लें. इस काढ़े से मुंह साफ करने से बच्चों के मुंह से लार टपकना बंद हो जाता है.

आग से जलने पर : मुलेठी और चंदन को पानी के साथ घिसकर शरीर के जले हुए भाग पर लेप करने से ठंडक मिलती है.

त्वचा का सूखकर मोटा और सख्त हो जाना : भिलावे की वजह से यदि त्वचा की सूजन हो गई हो तो मुलेठी और तिल को दूध के साथ पीसकर लगाने से आराम आता है.

सूखा रोग (रिकेट्स) : लगभग 6 ग्राम मुलहठी, 3 ग्राम इलायची, 3 ग्राम दालचीनी, 3 ग्राम तुलसी के पत्ते, 3 ग्राम बंशलोचन, लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग केसर और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को तुलसी के रस में मिलाकर लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग की गोली बना लें. 1-1 गोली मां के दूध के साथ नियमित 3-4 बार बच्चे को देने से सूखा रोग (रिकेट्स) दूर हो जाता है.

छोटे बच्चों के फोडे़, घाव, नासूर : मुलेठी, कड़वे नीम के पत्ते, दारूहल्दी को कूट-पीसकर घी में मिलाकर मरहम बना लें. इस मरहम के लगाने से घाव (जख्म) अन्दर से भर जाता है. अगर घाव में खराबी हो, किसी भी दवाई से आराम न हुआ हो तो नीम के पत्ते डालकर पानी उबाल लें और उससे घाव को धोकर ऊपर से यह मरहम लगा दीजिये. घाव चाहे जैसा भी हो, फोड़ा, नासूर या किसी भी प्रकार का घाव हो. यह मलहम कुछ दिनों तक लगातार लगाने से और घाव को धोने से आराम हो जाएगा. अगर फोड़ा फूटकर बहता हो तो कड़वे नीम के पत्तों को पीसकर और शहद में मिलाकर लगाना चाहिए.

नाड़ी का दर्द : 100 ग्राम मुलहठी को पीस लें और रात को सोते समय इसको गर्म दूध के साथ लें. इससे स्नायु के रोग में लाभ होता है.

स्वर यंत्र में जलन होने पर : मुलहठी (जेठीमधु) का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहने से स्वरयंत्र शोथ (गले में सूजन) ठीक हो जाती है.

शरीर को शक्तिशाली बनाना : मुलहठी के चूर्ण को एक शीशी में भरकर रख दें और रोजाना 6 ग्राम मुलहठी के चूर्ण को 30 मिलीलीटर दूध में घोलकर पीने से शरीर में ताकत आती है.

बच्चों की नाभि का पकना : हल्दी, घोघ, फूल प्रियंगु और मुलेठी को पानी में पीसकर लुगदी सी बना लें और पीछे कलईदार बर्तन में काले तिल का तेल और लुग्दी मिलाकर तेल पका लें. इस तेल को नाभि पर धीरे-धीरे लगाने और इन्ही चारों दवाओं को बारीक पीसकर लगाने से नाभि-पाक (टुंडी का पकना) में आराम हो जाता है.

गले की सूजन : 10 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम मुलहठी, 5 ग्राम लौंग, 5 ग्राम हरड़ और 20 ग्राम मिश्री को पीसकर चूर्ण बना लें. इसमें से 1 चम्मच चूर्ण सुबह शहद के साथ धीरे-धीरे चाटने से पुरानी खांसी और पुराने जुकाम के कारण गले की खराबी, सिर दर्द, गले की खराश आदि रोग दूर हो जाते हैं.

स्वर भंग (गले का बैठ जाना) : मुलहठी को चूसने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है और गला भी साफ हो जाता है. मुलेठी के आधे चम्मच चूर्ण में आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है.

पेट और आंतों के घाव : पेट और आंतों के घाव में मुलहठी की जड़ का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में 1 कप दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करें. इसे लगातार करते रहने से अल्सर कुछ ही हफ्तों में भर जायेंगें. इस प्रयोग के समय मिर्च मसालों नहीं खाना चाहिए.

कृपया ध्यान रहे : मुलहठी के सेवन के दौरान गर्म प्रकृति के पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. मुलेठी की चूर्ण को निर्धारित मात्रा में निर्धारित समय तक ही लेना चाहिए. अधिक मात्रा में या लम्बे समय तक इसका सेवन हानिप्रद है. कई रोगों में इसका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए.



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