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येडा बनके पेड़ा खाना - नेहरू, ऑफ कोर्स

आज जब नेहरू के काले कारनामे बाहर आ रहे हैं तो उनके साथ साथ धीरे से यह पुड़िया खोली जा रही है कि उन्हें सपने देखना अच्छा लगता था। जो सपने उन्हें अच्छे लगे, वे उन्होने देश को दिये । ये सपने उनको जिन लोगों ने दिखाये वे लोग गलत थे, या ऐसा लोगों को लग रहा है आज, पता नहीं कल सही भी साबित होंगे, लेकिन आज भगवी सरकार है तो ऐसे सोचनेवाले निकाल आए हैं । नेहरू के इरादे अच्छे थे, बस शायद कान के कच्चे थे । देश के लिए अच्छे व्यक्ति थे, उनकी ठरक उनका निजी मामला था ।

ऊपरी पैराग्राफ को डैमेज कंट्रोल की तौर पर देखा जाये । कितने किन्तु परंतु हैं वे देख लीजिये, जिनसे नेहरू को फिर से स्थापित किया जा सके । प्रार्थना है कि उसे दुबारा पढ़ें ।

इसपर अलग से लिखेंगे, फिलहाल अपनी कमेंट्स जरूर दें । बिनती यही है कि उनकी ठरक पर न लिखें, वो वाकई उनका निजी मामला था। किसी को जबर्दस्ती उठाकर नहीं लाये थे और प्रसिद्ध पुरुषोंपर महिलाएं खुद को न्योछावर करती हैं, उसका लाभ न लेनेवाले बहुत कम लोग होते हैं । अगर हम उनकी ठरक को उनके निर्णयों के लिए जिम्मेदार मानेंगे तो उनके apologists के झांसे में आ रहे हैं । उदाहरण दे कर स्पष्ट कर रहा हूँ - हमारी दुरवस्था के लिए नेहरू नहीं उनकी ठरक जिम्मेदार है - क्या यह कहना सही होगा ? यह वैसा ही होगा जैसे गुरमेहर का कहना कि उसके पिता को पाकिस्तानियों ने नहीं, युद्ध ने मारा। नेहरू के निर्णयों के परिणामों की समीक्षा साक्षी भाव से ही होनी चाहिए तभी उनकी हिंदुओं के प्रति निजी दुष्टता और दुर्भावना समझ में आएगी। महज उसकी ठरक को जिम्मेदार ठहराके हम नेहरू को क्लीन चिट दे रहे हैं ।

इसलिए ठरक को बाहर रखें, उनकी policies की चर्चा करें कि नेहरू वाकई एक मूर्ख सपने देखनेवाले थे या एक हिंदुद्वेष्टा थे जिन्होने अपने पद का हिंदुओं के नुकसान के लिए जितना हो सके उतना पूरा दुरुपयोग किया । इसी मानसिकता के चलते उन्होने हिन्दू विरोधियों को सरकारी खर्चे से स्थापित और मजबूत किया ।

येडा बनके पेड़ा खाना एक बंबइया मुहावरा है जिसका मतलब होता है कि पागल होने का बहाना कर के अपना ईप्सित साध्य कर लेना । आज नेहरू की समीक्षा हो और आलोचना हो तो कई काइयों के तशरीफ तले से आसन खींचे जाएंगे । आज जो डैमेज कंट्रोल में दिखते हैं उनको नजदीक से देखना चाहिए, उनका घर कैसे चलता है । हो सकता है पत्रकार कहलानेवाले भाड़े के भांड हों या फिर तत्सम कोई मुखलेपन किए हुए मृदंग जो मधुर ध्वनि कर रहे हों ।

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