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ठगी या खिलवाड़

एक और जहां भारत में बेरोजगारी का प्रतिशत दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है वहीं दूसरी ओर हर महीने एक नया ठगी का घोटाला सामने आ जाता है । विगत दिनों नोएडा में 3700 करोड रुपए के घोटाले के सामने आने पर हमारे सामने कई ऐसे प्रश्न आते हैं जिनका जवाब एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते ढूंढना बहुत जरूरी हो जाता है ।
सबसे पहला सवाल जो हमारे सामने आता है वह यह है कि किस प्रकार ऐसी कंपनियां इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने में सफल हो पाई ?

भारत एक विकासशील देश है और अभी हमारी युवा जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा बेरोजगार घूम रहा है । बेरोजगारी का दंश सह चुके व्यक्ति इस एक शब्द को जिस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं कोई दूसरा नहीं कर सकता । बेरोजगार व्यक्ति येन केन प्रकारेण किसी भी प्रकार से रोजगार हासिल करना चाहता है । इस प्रकार की जालसाजी वाली कंपनियां बनाने वाले बेरोजगारों की इसी मनोस्थिति का फायदा उठाते हुए दिखते हैं । रोजगार पाने के लिए किसी भी हद तक चले जाना और आगे पीछे न सोचते हुए केवल "हमारे पास काम है" यह जतलाना ही बेरोजगारों का पहला काम हो जाता है ।
दूसरी स्थिति जिसका सामना मैंने स्वयं कई बार किया है वह है हमारी कार्य शैली में कामचोरी का स्थान

कुछ वर्ष पूर्व मैंने अपने कस्बे में राष्ट्र_सेवा_संघ के नाम से एक संगठन की स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य बेरोजगारों को बड़े शहरों में रोजगार दिलाना ही था लेकिन अपने स्वयं के कस्बे में जिस प्रकार की असफलता का सामना हमारे संगठन को करना पड़ा उससे तो यही लगा के यहां किसी को रोजगार की आवश्यकता ही नहीं है । दिल्ली नोएडा,गुडगांव,मानेसर,लुधियाना आदि शहरों में भेजे गए अधिकांश युवा 10 से 15 दिन में ही काम करके वापस आ गए । कोई भी युवा वहां श्रमिकों वाला कार्य करने के लिए तैयार नहीं था जबकि उन कामों में मिलने वाला वेतन बंद कमरे में बैठकर करने वाले वेतन से अधिक था लेकिन फिर भी उन सभी के मन में कहीं ना कहीं ये आकांक्षा थी कि हमें कुर्सी पर बैठकर कलम चलाने वाला काम ही मिले ।

हर एक व्यक्ति सीधे 15 से 20 हजार रुपए की नौकरी पाने की इच्छा रखता था और उस के सापेक्ष काम करने के लिए तैयार नहीं था
इस प्रकार की जालसाजी वाली कंपनी लड़कों की इसी मनोस्थिति का फायदा उठाते हैं । इन कंपनियों का दावा होता है कि आपको काम तो न्यूनतम करना है लेकिन आप का भुगतान अधिकतम किया जाएगा । गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रकार की कंपनियों के शिकार ज्यादातर पढ़े-लिखे लड़के होते हैं । पार्ट टाइम में एक बढ़िया राशि कमाने का लालच भी युवाओं को इस प्रकार की कंपनियों से जोड़ने को प्रेरित करता है ।

ऐसा नहीं है कि यह 3700 करोड़ रुपए की ठगी अपने जैसी कोई पहली ठगी हो इससे पहले भी कई बार ऐसे ही मामले सामने आ चुके हैं और इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि आगे ऐसा कोई मामला सामने नहीं आएगा ।
इस प्रकार की कंपनियां तब तक युवाओं को ठगती रहेंगे जब तक आने वाली कोई भी सरकार इन बेरोजगार युवाओं के भविष्य के बारे में कोई ठोस और कड़ा निर्णय नहीं लेगी । बेरोजगारी के दंश से ग्रसित युवाओं को इस प्रकार की कंपनियों के जाल में फसने से बचाने के लिए एक दृढ़संकल्पित सरकार की आवश्यकता है न कि अपने खजाने भरने वाली सरकार की ।

सतर्क रहें सुरक्षित रहें

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